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Old May 12th, 2012, 12:43 AM   #501
Yagya
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Garbage collection to be privatised; money to be included in electricity bill

दीवाली तक घरों से कचरा उठाने लगेंगी कंपनियां!

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विशेष संवाददाता त्न जयपुर

प्रदेश के 6 संभाग मुख्यालयों पर शहर की सफाई व्यवस्था प्राइवेट कंपनियों के सुपुर्द की जाएगी। पहले चरण में सरकार ने जयपुर और जोधपुर शहरों की सफाई ठेके पर देने का फैसला किया। दो कंपनियों का चयन कर लिया गया। ये कंपनियां घर-घर से कचरा एकत्र करने के साथ ही परिवहन से लेकर निस्तारण तक सारा काम करेंगी। इसके लिए इन्हें अगले माह तक वर्क ऑर्डर मिलने और जयपुर में दीवाली तक घरों से कचरा उठने की व्यवस्था शुरू हो जाने की उम्मीद है।

नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल ने शुक्रवार को इन कंपनियों का प्रजेंटेशन देखा। जयपुर मेयर ज्योति खंडेलवाल, जोधपुर मेयर रामेश्वर दाधीच मौजूद थे। बैठक में जयपुर की सफाई व्यवस्था ए टू जेड इन्फ्रास्ट्रक्चर लि. गुडग़ांव व जोधपुर की सफाई व्यवस्था रामकी इन्वायरो इंजीनियर्स दिल्ली को सौंपना तय हुआ। अहमदाबाद के अरबन मैनेजमेंट कंसलटेंट पी.यू. असनानी कार्य प्रणाली को अंतिम रूप देंगे। कंपनियां कार्बन क्रेडिट का पैसा निकायों के साथ शेयर करेगी। उन्हें 1 रुपए के टोकन पर 20 साल की लीज पर डम्पिंग यार्ड के लिए जमीन उपलब्ध कराई जाएगी।

ऐसी होगी सफाई : 25 वार्डों की कम्पलीट व्यवस्था निजी कंपनी को। 21 वार्डों में आंशिक सफाई व्यवस्था निजी कंपनी को। 31 वार्डों पहले शुरू होगी घर-घर कचरा संग्रहण योजना। 1800 कर्मचारी लगेंगे निजी कंपनी के। 33.68 करोड़ रुपए का खर्चा आएगा। 10.57 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार पड़ेगा। 865 रुपए प्रति टन की दर से 900 टन कचरा रोजाना उठेगा। दीपावली तक कंपनी काम शुरू कर देगी। शुरू के 3 माह तक कंपनी को कोई पैसा नहीं दिया जाएगा।

फिर बढ़ेगा बिजली बिल : घर-घर से कचरा एकत्र करने और परिवहन पर खर्च होने वाली राशि की भरपाई के लिए सरकार ने बिजली के बिल में शुल्क वसूलने की तैयारी कर ली। इसके लिए 30 से 40 रुपए प्रति माह तक की वसूली हो सकती है। हालांकि सरकार 100 से 200 यूनिट वाले उपभोक्ताओं को इससे छूट देने पर विचार कर रही है।

॥ निजी कंपनियों और निगम के दायित्व स्पष्ट रूप से तय किए जाएंगे ताकि वे एक-दूसरे पर जिम्मेदारी नहीं डाल सकें। निगम के मौजूदा सफाई कर्मी यथावत काम करते रहेंगे। चरणबद्ध तरीके सभी संभाग मुख्यालयों की सफाई व्यवस्था निजी कंपनियों को दी जाएगी। वे घर-घर से कचरा उठाएंगी ताकि घरों का कचरा सड़कों पर नहीं आए। -शांति धारीवाल, नगरीय विकास मंत्री

source:e bhaskar
जयपुर और जोधपुर में सफाई व्यवस्था निजी हाथों में देने का शुक्रवार को फैसला करने के बाद अपने निवास पर मीडिया को जानकारी देते हुए नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल।
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Last edited by Yagya; May 12th, 2012 at 05:06 PM.
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Old May 13th, 2012, 04:51 PM   #502
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Ignore the headline...

Rajasthan develops at Jaipur's cost

Quote:
Jaipur: The town planners with the Urban Development and Housing department are stuck in a dilemma — whether to accord priority to the master plan of major cities of state for their planned development or attend to the immediate needs of the infrastructure works in Jaipur.

In his budget speech, chief minister Ashok Gehlot, announced that draft master plans would be prepared for all towns in state. The positive action for planned state has, however, come at the expense of the housing and infrastructure requirements of the city.

Since the CM’s announcement, the state town planning department has been engaged in drafting the provisions and drawings of master plans for 184 towns, i.e. municipalities. The department has completed many of the plans while few are nearing completion. Interestingly, the progress of state planning has hit the housing and infrastructure growth of the Pink City hard.

According to sources, the state government has also constituted a committee to draft amendments in building bylaws of the Jaipur development authority (JDA). The committee has the same town planners that are engaged in drafting master plans.

The proposed amendments are related with redefining FAR (floor area ratio) in buildings.

The hike in FAR is supposed to be a boon for multistoried buildings in Jaipur that is expected to create more housing space.

Similarly, the parking proposals near Metro project are also waiting for the amendments mooted by the JDA officials. But, the committee has failed to take up any of these proposals and others as the committee has dedicated its duties to drafting the master plans of other towns.

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Old May 14th, 2012, 05:26 PM   #503
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RINL and SAIL to get nod soon for mining in Rajasthan

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Hindu reported that centre will give its nod soon for granting lease for iron ore mining to Rashtriya Ispat Nigam Limited.

Indian steel secretary Mr DRS Chaudhary told The Hindu that “After the Rajasthan government gave its consent to grant mining lease to RINL, the centre is in the process of giving the green signal.”

Along with RINL, Steel Authority of India Limited is also being granted mining leases in Bhilwara of Rajasthan.

While SAIL will get leases in an area of 864.6 hectares, RINL will be granted leases in 1,043 hectares. Both projects are expected to provide direct employment to 2,000 and indirectly to 20,000 people in Rajasthan.

The Rajasthan mines have low grade magnetic ore. Both the public sector units will need magnetic separation and pellet plants to use the ore as fines for steel production.

Mr Chaudhary said the leases to explore an estimated 325 million tonne of ore would give the much needed raw material security to RINL to a large extent. RINL is the only public sector steel producer without any captive mines thereby shelling down a heavy amount for raw material sourcing from NMDC and other agencies.

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Old May 16th, 2012, 06:32 PM   #504
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अलवर में बनेगा ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा,रक्षा मंत्रालय ने दिखाई हरी झंडी

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नई दिल्ली.राजस्थान के अलवर में विकसित किए जाने वाले ग्रीनफील्ड अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर परियोजना के तहत डीएमआईसी डीसी के आवेदन पर रक्षा मंत्रालय ने अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) दे दिया है। मंगलवार को केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ राज्य की विभिन्न विकास योजनाओं की समीक्षा बैठक के दौरान उक्त जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि अलवर जिले में कोटकासिम में हवाई अड्डे के लिए स्थान का चयन किया गया है। वे इस संबंध में शीघ्र ही केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री से चर्चा कर हवाई अड्डे की भारत सरकार से मंजूरी दिलाने का प्रयास करेंगे। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर के तहत भिवाड़ी-नीमराना-बहरोड़ आदि प्रथम नोड के साथ ही राज्य सरकार द्वारा जोधपुर-पाली-मारवाड़ को दूसरे नोड के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है।

लैदर क्लस्टर का विकास :

राजस्थान में ‘मेगा लैदर क्लस्टर’ के विकास की मंजूरी दिए जाने पर भी विचार चल रहा है। आनंद शर्मा ने बताया कि राज्य की टैक्सटाइल्स मिलों की प्रदूषण समस्या का निवारण करने के अलावा नेशनल टैक्सटाइल कॉपरेरेशन की ब्यावर, उदयपुर और विजयनगर स्थित तीनों मिलों के आधुनिकीकरण के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं। पाली, बालोतरा व जोधपुर की बंद कपड़ा मिलों की समस्याओं का समाधान करने का प्रयास किया जा रहा है। गहलोत ने केंद्रीय मंत्री से अनुरोध किया कि पाली, बालोतरा और जोधपुर क्षेत्र में स्थापित टेक्सटाइल ड्राइंग प्रिंटिंग के क्लस्टर को तिरुपति की तरह लगभग 200 करोड़ रुपए का विशेष पैकेज मंजूर किया जाए।

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Old May 16th, 2012, 07:02 PM   #505
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Union petroleum minister jaipal reddy assures the chief minister that decision on establishing an oil refinery in the state will be taken soon

राजस्थान में तेल रिफाइनरी के संबंध में शीघ्र निर्णय लेंगे


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नई दिल्ली.राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री एस. जयपाल रेड्डी से राजस्थान के बाड़मेर में तेल रिफाइनरी की स्थापना करवाने का पुरजोर आग्रह किया है। गहलोत ने सोमवार को नई दिल्ली में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री जयपाल रेड्डी से उनके सरकारी निवास पर भेंट कर प्रदेश में तेल रिफाइनरी की स्थापना के संबंध में विस्तार से वार्ता की।

उन्होंने केंद्रीय मंत्री से प्रदेश में रिफाइनरी की स्थापना के संबंध में शीघ्र ही निर्णय लेने का अनुरोध किया, ताकि राज्य में तेल एवं गैस के मिले अथाह भंडार का लाभ प्रदेशवासियों को मिल सके। मुख्यमंत्री ने रेड्डी को बताया कि बाड़मेर में रिफाइनरी की स्थापना की मांग काफी समय से लंबित है, जबकि पश्चिम राजस्थान में तेल के अथाह भंडार मिलने के बाद से ही रिफाइनरी को लेकर राज्य की जनता द्वारा लगातार इसकी मांग की जा रही है।

भेंट के पश्चात केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री एस. जयपाल रेड्डी ने बताया कि राजस्थान में रिफाइनरी की स्थापना करने के संबंध में मुख्यमंत्री गहलोत ने उपयोगी एवं सारगर्भित सुझाव दिए हैं। साथ ही त्रिपाठी कमेटी की अनुशंसाओं से भी अवगत करवाया है। उन्होंने बताया कि राजस्थान में रिफाइनरी की स्थापना के संबंध में शीघ्र ही फैसला किया जाएगा और हम यथासंभव राजस्थान की अपेक्षाओं के अनुकूल निर्णय करेंगे। रेड्डी ने कहा कि राजस्थान सरकार के प्रस्ताव अच्छे हैं।

पिछले दिनों तेल की कीमतें बढ़ी हैं। इस परिप्रेक्ष्य में विभिन्न तेल कंपनियों के साथ वार्ता की जा रही है और हमें आशा है कि रिफाइनरी के संबंध में हम शीघ्र ही आशानुरूप फैसला करेंगे।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री गहलोत ने बताया कि केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री के साथ सकारात्मक बातचीत हुई है और आशा है कि वार्ता के अच्छे परिणाम मिलेंगे। उन्होंने बताया कि केंद्र द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति रिफाइनरी संबंधी प्रस्ताव का परीक्षण कर रही है और ओ.एन.जी.सी. एवं एच.पी.सी.एल. के साथ ही सकारात्मक सोच के साथ वार्ता जारी है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि हाल ही में ओएनजीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक ने भी अपने जयपुर प्रवास में उनसे रिफाइनरी और सौर ऊर्जा परियोजनाओं के संबंध में विचार -विमर्श किया है।
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Old May 18th, 2012, 07:27 PM   #506
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Indira Gandhi Canal's water will reach Barmer by July end

बाड़मेर में जुलाई के अंत तक पहुंचेगा इंदिरा गांधी नहर का पानी

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जयपुर। इंदिरा गांधी नहर का पानी बाड़मेर शहर में जुलाई के अंत तक पहुंच जाएगा। रेगिस्तान के सुदूर सीमावर्ती क्षेत्र के लिए हिमालय का पानी पहुंचना न सिर्फ ऐतिहासिक होगा बल्कि लोगों के वरदान भी साबित होगा। चार से सात दिन के अंतराल से सरकारी पानी से काम चला रहे लोगों को इसका बेसब्री से इंतजार है। बाड़मेर और आसपास के क्षेत्र के बनाई इस योजना के लिए पाइप लाइन और पंप स्टेशन लगाने का काम पूरा होकर टेस्टिंग की जा चुकी है।

जैसलमेर के मोहनगढ़ से होकर निकलने वाली इंदिरा गांधी नहर से बाड़मेर तक के लिए पानी लेने का सिस्टम बनाया गया है। इस छोर के निकट ही फिल्टर प्लांट बनाया गया है। यहां से बाड़मेर तक 197 किलोमीटर की दूरी तक के लिए पाइप लाइन बिछाई गई है। इसके लिए बीच में पंपिंग स्टेशन भी बनाए गए हैं। पीएचईडी के मुख्य अभियंता (विशेष परियोजना) रूपा राम ने बताया कि इसी जुलाई के अंत तक पानी बाड़मेर शहर तक पहुंच जाएगा और लोगों को मीठा फिल्टर किया हुआ पानी मिलने लगेगा। उन्होंने बताया कि बाड़मेर के निकट जैसलमेर तक भागू का फांटा तक पानी पहुंच चुका है। इससे आगे के लिए छोटी मोटी औपचारिकताएं बाकी है।

क्या है योजना :

रूपा राम ने बताया कि यह योजना बाड़मेर शहर और 691 गांवों के बनाई गई थी। इनमें 529 गांव बाड़मेर जिले और 162 गांव जैसलमेर जिले के हैं। इस पर अब तक 666 करोड़ रुपए की राशि खर्च हो चुकी है। इसमें राज्य सरकार के साथ केंद्र सरकार और रक्षा मंत्रालय का हिस्सा भी शामिल हैं। इस योजना में 172 एम एलडी (मिलियन लीटर पर डे) पानी दिया जाना प्रस्तावित है, जिसमें से 52 एम एलडी सेना के लिए है। उन्होंने बताया कि इसके अगले चरण में 691 गांवों में से 172 बाड़मेर और 68 गांव जैसलमेर के लिए योजना मंजूर की गई है।

source
While I adore metro and other flashy projects, in reality it's projects like these which make me really happy. Nothing greater than providing the basic things for survival. Easy access to water really can change people's lives a lot.
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Old May 27th, 2012, 01:05 AM   #507
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15000 करोड़ के निवेश पर 15 लाख को रोजगार

Quote:
राज्य में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों का तेजी से विकास हो रहा है। उद्योग के बढ़ रहे महत्व का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अब तक 3.64 लाख इकाइयां एमएसएमई के तहत पंजीकृत हो चुकी हैं। इनमें कोयला, आयरन एंड स्टील से लेकर कुटीर उद्योग तक की इकाइयां शामिल हैं। इन इकाइयों से राज्य में 15000 करोड़ का निवेश भी आकर्षित हुआ। तेजी से जड़ें मजबूत कर रहे एमएसएमई क्षेत्र ने प्रदेशभर में प्रत्यक्ष रूप से 15 लाख लोगों को रोजगार के अवसर सृजित किए। देश के विकास में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के योगदान पर सीआईआई की राजस्थान स्टेट काउंसिल द्वारा आयोजित एमएसएमई कॉनक्लेव 2012 में राजस्थान स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज (एसएसआई) के सचिव राजेश्वर सिंह ने बताया कि पिछड़े क्षेत्रों और उद्यमियों के विकास को
लक्षित करते हुए प्रदेश में राजस्थान इनवेस्टमेंट प्रमोशन स्कीम-2010 लागू की गई। यह स्कीम मार्च, 2018 तक लागू रहेगी। इसमें मिलने वाली रियायतों का ही असर है कि अब तक 1530 लोगों ने राज्य में इकाई स्थापित करने के लिए सरकार को प्रस्ताव दिए। करीब 18000 करोड़ के इन निवेश प्रस्तावों में से राज्य सरकार ने 7000 करोड़ के 1305 प्रस्तावों को मंजूरी दे दी। उत्तर पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक आरसी अग्रवाल, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के सीएमडी एम.वी. टकसाले सहित नामचीन कंपनियों से आए प्रतिनिधियों ने प्रस्तुतीकरण भी दिया।

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Old May 31st, 2012, 10:25 AM   #508
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Kishangarh international airport gets high court nod

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JAIPUR: A division bench of high court comprising Justice Mohammad Rafiq and Justice R S Rathore on Thursday allowed the construction of an international airport at Kishangarh near Ajmer. The bench rejected the plea of the royal family of Kishangarh and held that the petitioners mislead the court by filing wrong statements and were challenging the acquisition after 24 years.

The matter was strongly contested on behalf of petitioner Brajraj Singh, the eldest son of erstwhile ruler Sumer Singhji and his other siblings whose 3003 bigha of land at Kishangarh-B village was acquired by state government in 1976 for constructing the airport. The Centre had recognized private properties of former estate of Kishangarh by an order dated August 8, 1949 wherein the land in dispute was treated as estate property.

After death of erstwhile ruler Sumer Singhji on Feburary 16, 1971, the Central government recognized Brajraj Singh as ruler of Kishangarh. An acquisition proceeding was initiated by the district collector under Land Reforms and Acquisition of Landowner's Estate Act, 1963 and on February 20, 1976 the land in dispute was acquired and possession also taken. The tehsildar of Kishangarh passed an eviction order with fine under Section 91A of Rajasthan Land Revenue Act on May 22, 2000 which was challenged by the petitioner in the court. A writ petition, as also an appeal, were dismissed by the high court holding the royal family guilty of suppression of facts and making misleading statements.

It was contended by K K Mahrshi, senior counsel for petitioner that the petitioners were not served with the notice of acquisition proceedings and the compensation commission passed the compensation at their back. The plea was opposed by advocate general G S Bapna who contended that a notice was duly served on Brajraj Singh, who happens to be the main petitioner and once a notice is served to co-owner of a land, the same is deem sufficient service over the other co-owners.

In a review petition file by the petitioner, the division bench of Justice Mohammad Rafiq and Justice R S Rathore came down heavily on the petitioner saying: "The state government is right in saying that the petitioners were duly served. Even this is their own admission in Para no. 15 of the writ petition. In a review, court does not sit in an appeal."

"The very invocation of high prerogative jurisdiction impales a party to state truth and correct facts. Misrepresentation and misstatement was thus one aspect but the other aspect was that writ was filed after a delay of 24 long years and that too without availing an alternative remedy before the Revenue Board against the order of eviction passed by tehsildar. As such, there is no ground for interference," Justice Rafiq observed in the order on behalf of bench.

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Old June 2nd, 2012, 12:57 PM   #509
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नागौर में पानी के लिए 3000 करोड़ का प्रोजेक्ट


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फ्लोराइड और खारे पानी की समस्या से जूझ रहे नागौर जिले के लोगों को इंदिरा गांधी नहर का पानी उपलब्ध कराने के लिए जापान इंटरनेशनल कॉर्पोरेशन एजेंसी (जायका) ने राज्य सरकार की योजना को मंजूरी दे दी है। इसमें सात कस्बों और 986 गांवों को पानी देने की योजना है। करीब 3000 करोड़ की इस परियोजना के लिए जायका 2200 करोड़ रुपए देगा। बाकी राशि राज्य सरकार देगी।

इंदिरा गांधी नहर से प्रथम चरण के पहले और दूसरे पार्ट के रूप में लिफ्ट नहर के जरिए नागौर और बासनी को पानी हाल ही में पहुंचाया गया है। प्रथम चरण के तीसरे और चौथे पार्ट में मूंडवा, कुचेरा और मेड़ता को पानी पहुंचाने का काम आगामी दो साल में पूरा हो जाएगा। इसके टेंडर हो चुके हैं और काम शुरू होने को है द्वितीय चरण में शामिल जिले सात कस्बों सहित कुल बारह नगरों और कस्बों को पानी पहुंच जाएगा। इनके साथ द्वितीय चरण में 986 गांवों को जोडऩे की योजना भी शामिल है। जायका से मंजूर ऋण में से इस परियोजना के शुरुआत के लिए 1000 करोड़ रुपए की राशि अगले साल हासिल कर ली जाएगी।

परियोजना पर काम अगले साल से

इस परियोजना के मार्च तक टेंडर का काम करके जुलाई में काम शुरू कर दिया जाएगा। अनुमान के अनुसार 2017-18 तक इन सात कस्बों को पानी मिलना शुरू हो जाएगा।

इन कस्बों को होगा फायदा

द्वितीय चरण में शामिल सात कस्बों में लाडनूं, डीडवाना, कुचामन, मकराना, परबतसर, नावां और डेगाना को शामिल किया गया है। बीकानेर जिले के नोखा के निकट बनाए गए बड़े टैंक और पाइप लाइन से ही नए पाइप जोड़कर पानी को मोड़ा जाएगा।

अगले साल शुरू होगा काम

॥ जायका ने नागौर जिले के सात कस्बों को पेयजल की परियोजना के लिए 2200 करोड़ देना मंजूर किया है। काम अगले साल शुरू हो जाएगा।॥ रूपा राम, चीफ इंजीनियर (विशेष परियोजना), पीएचईडी।

source: e bhaskar
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Old June 2nd, 2012, 01:05 PM   #510
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कैबिनेट में जाएगा 6000 करोड़ रु. के निवेश प्रस्ताव


जेसीबी इंडिया, हीरो मोटर कॉर्प और चंबल फर्टिलाइजर विस्तार परियोजना

Quote:
उद्योग प्रोत्साहन के कस्टमाइज्ड पैकेज के तहत निवेशकों को आकर्षित करने के लिए इंपावर्ड कमेटी की शुक्रवार को हुई आठवीं बैठक में विभिन्न क्षेत्रों के 6000 करोड़ रु. से ज्यादा के निवेश प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की गई। इनमें कोटा जिले में चंबल फर्टिलाइजर की 4500 करोड़ रु. की विस्तार योजना, निर्माण उपकरण बनाने वाली जेसीबी इंडिया के 500 करोड़ रु. और हीरो मोटर कॉर्प के 900 करोड़ रु. के प्रस्ताव शामिल हैं। इनको मंजूरी के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित इंपावर्ड कमेटी ने कैबिनेट की बैठक में पेश करने की सिफारिश भी की है।

उद्योग विभाग के सूत्रों के मुताबिक, अगले सप्ताह कैबिनेट की बैठक में विभाग से जुड़े सात-आठ प्रस्तावों पर चर्चा के लिए विभागीय स्तर पर तैयारियां चल रही हैं। मुख्य सचिव सीके मैथ्यू की अध्यक्षता में शुक्रवार को में सिरोही जिले में 100 करोड़ रु. की प्रस्तावित मानव भारती इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के लिए जमीन अधिग्रहण के मुद्दे पर विचार-विमर्श हुआ। इसके अलावा लंबे समय से हरपावत इंटरप्राइज द्वारा उदयपुर में 86 करोड़ रु. से जुड़े मामले में निर्माण अवधि की सीमा बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। बैठक में बीआईपी के आयुक्त पुरुषोत्तम अग्रवाल, अतिरिक्त आयुक्त अर्चना सिंह, खान व भूविज्ञान विभाग के सचिव एस पंत, वित्त विभाग के प्रमुख सचिव गोविंद शर्मा, वित्त और रेवेन्यू विभाग के भी अधिकारियों ने भी भाग लिया।


महिंद्रा वल्र्ड सिटी में यूनिट लगाएगी जेसीबी

बीआईपी को सौंपे निवेश प्रस्ताव के तहत जेसीबी इंडिया ने जयपुर के महिंद्रा वल्र्ड सिटी में अर्थ मूविंग एंड मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट लगाने की इच्छा जाहिर की है। 500 करोड़ रु. के निवेश वाली इस परियोजना को सात साल में पूरा किया जाएगा। इसके जरिए 1000 लोगों को प्रत्यक्ष और प्रत्यक्ष रूप से रोजगार भी मिलेगा।

:हीरो मोटर कॉर्प नीमराणा में लगाएगी यूनिट

उद्योग विभाग को भेजे प्रस्ताव में दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी हीरो मोटर कॉर्प ने राज्य में 900 करोड़ रु. का निवेश करने की इच्छा जाहिर की है। इसके तहत कंपनी जयपुर के कूकस में डेवलपमेंट सेंटर और नीमराणा में वाहन बनाने का कारखाना लगाएगी। कारखाने में 2500 वाहन रोजाना तैयार होंगे। इस परियोजना से 1000 लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

source: e bhaskar
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Old June 2nd, 2012, 01:30 PM   #511
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Panel clears investment of Rs 6,300 crore in Rajasthan

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JAIPUR: The state empowered committee under the chairmanship of chief secretary cleared the way for investment of more than Rs 6,300 crore in Rajasthan on Friday. These approved investment projects will now be placed before the state cabinet which is likely to be convened next week.

Chambal Fertilizers and Chemicals Limited which already has two plants at Gadepan in Kota district will make an investment of Rs 4,600 crore through its expansion at the existing facility. A new plant that will come up will have the production capacity of 13 lakh tonnes urea per year. The earlier two plants have a combined capacity to produce about 20 lakh tonnes of urea per annum.

JCB India, an earthmover machines manufacturer will make an investment of Rs 500 crore and set up a manufacturing plant in Mahindra World City (SEZ) at Ajmer Road. In its Jaipur plant the company will make a backhoe loader, fabrication units and other parts and components.

"The company already has plants at Pune and Ballabgarh in Haryana and both combined have an investment of Rs 900 crore. Project in Rajasthan will be the single highest investment made by the company and generate an employment for more than 1000 people. We expect that with JCB setting up its plant in Jaipur, more ancillary firms will also come up," said sources.

Confirming the news that these projects have been approved in the meeting, Purushottam Agarwal, commissioner (investment & NRI's) bureau of investment promotion said, "There is a positive perception about investment climate in Rajasthan and many industries have shown their interest in investing here. There are good proposals in the pipeline which are under consideration and examination."

Another major investment which was cleared by the empowered committee is of Hero MotoCorp Ltd.The company will set up a research and design (R&D) institute, manufacturing plant of high-end two-wheelers and a global parts center. The R&D plant will come up at Kukas while other two will be in Neemrana. The investment is expected to generate direct jobs for 1000 people.

The high-end two-wheelers plant will be the fourth manufacturing unit of the company. The global parts center will make the auto components which will be exported in other parts of the world.

A proposal for a hotel at Udaipur was also approved. The investment is of Rs. 86 crore made by a New York-based doctor. The land on which the hotel will come up belongs to the NRI but the government has given relaxation in land conversion and taxes.

"For all the investments the government has provided customized incentive packages. There are 7-8 more proposals which will be put before the cabinet. All of them have come because of lucrative schemes provided by the state government." said sources.

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Old June 4th, 2012, 11:17 PM   #512
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Hero MotoCorp to Build Two New Plants

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NEW DELHI – Hero MotoCorp Ltd. said Monday it will invest as much as 25.75 billion rupees ($464 million) until the end of March 2014 to build two new factories and expand research and development capabilities.

The investment plan is part of efforts by India's largest maker of two-wheeled vehicles by sales to keep its leadership position amid growing competition from Honda Motor Co., 7267.TO -3.70% Bajaj Auto Ltd. and Yamaha Motor Co. 7272.TO -3.86% The plan is significant also for Hero to expand its international sales because a partnership with Honda that ended early last year had prevented the New Delhi-based company from aggressively tapping into overseas markets.

Hero said the first of the two plants will be built in Neemrana, in the northwestern state of Rajasthan, while the second plant, the company's fifth facility, will come up in Gujarat, mainly to tap into the western state's ports for exporting vehicles worldwide.

Pawan Munjal, Hero's managing director and chief executive, told a news conference that four billion rupees will be invested at Neemrana with an initial capacity of 750,000 vehicles a year. A sum of 11 billion rupees will be spent to build the Gujarat facility, which will initially produce 1.2 million vehicles a year, going up to 1.8 million in the second phase.

Both the factories are to open by July-September 2013, Mr. Munjal said. An additional four billion rupees will be invested to build a research and development center near Jaipur, the capital of Rajasthan.

"My expectation from the two-wheeler industry is very bullish," Mr. Munjal said. "We have years and years of growth available to us."

He said Hero MotoCorp will invest five billion rupees to expand capacities at its existing three plants -- two in northern India's Haryana state and one in Uttarakhand state, also in the north.

The company is aiming at a combined annual capacity of more than nine million vehicles by the end of March 2014 from about seven million now, Mr. Munjal said. He said also that the company will start exporting two-wheelers to some countries in central Asia as well as Nigeria by the end of September and is also considering building assembly plants overseas.

"Our initial focus is on markets where the volumes are large, and products can be sold with minimum changes. So right now, our existing products with suitable modifications will be made available in these new international markets," Mr. Munjal said.

He said the company is expecting a 25% rise in its international business in the first year with the new export initiatives.

The company's chief financial officer, Ravi Sud, said the fresh investments will be made from the company's 40 billion rupees cash reserves as well as the 25 billion rupees cash generated every year.

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Old June 5th, 2012, 05:59 PM   #513
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HPCL keen on oil refinery at Barmer in Rajasthan

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NEW DELHI: With ONGC deterring from building a refinery in Rajasthan, state-owned Hindustan Petroleum (HPCL) has expressed interest in setting up a 9 million tonne unit at the site of the massive oil find at Barmer district.

HPCL, which owns a refinery at Mumbai and Visakhapatnam in Andhra Pradesh and is equal partner in the just commissioned Bhatinda refinery in Punjab, is keen to take up the project, sources privy to the development said.

Oil and Natural Gas Corp (ONGC), which owns 30 per cent interest in the Barmer oilfields of Cairn India, had in 2005 committed to building the refinery but later started soft- peddling the project.

Sources said HPCL has now entered the fray and has proposed to take 51 per cent stake in the project. ONGC, which originally had the authorisation from the government for processing the Barmer crude at the proposed refinery, would hold 26 per cent interest.

Cairn India, which holds 70 per cent interest in the fields, currently produces about 175,000 barrels per day oil (8.75 million tonnes a year) from the Rajasthan fields and has potential to go up to 300,000 bpd (15 million tonnes).

Sources said Rajasthan government has started the process of land acquisition of about 926 hectares.

Cairn India's Barmer find is now estimated to hold 6.5 billion barrels (900 million tonnes) of oil equivalent in place.

Production from Mangala oilfield, the largest of the 24 finds in the block, started on August 2009 and currently Mangala, Bhagyam and Aishwariya fields are producing about 175,000 bpd.

ONGC, after the exit of its flamboyant chairman Subir Raha whose brainchild was the setting up of the refinery, got SBI Caps to do a Financial Appraisal Study for the Rajasthan refinery.

The study found that a 7.5 million tonnes unit at Barmer would give just 1.15 per cent return and the company sought fiscal support at the rate of Rs 1,300 crore per annum in interest free loan for first 16 years.

With state persisting with the project, the Centre appointed a BC Tripathi Committee, which recommended that the state government take 26 per cent equity in the project and give 50 per cent exemption in excise duty to make it viable.

After submission of the Tripathi Committee report, ONGC once again examined detailed feasibility for a 4.5 million tonnes unit capacity through EIL in 2010 and subsequent financial appraisal by SBI Caps in 2011.

As per the financial analysis of the merchant banker, the project was not viable on standalone basis and required interest free loan of approximately Rs 1,100 crore per annum for 15 years from Rajasthan government.

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Old June 6th, 2012, 07:47 PM   #514
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Rajasthan to strengthen water supply for NCR

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Jaipur, Jun 6 (PTI) Rajasthan government today in principle approved projects for strengthening water supply in Alwar district areas of the state which also fall under the NCR region. In a meeting chaired by Principal Secretary UDH G S Sandhu, the matter of water supply in Alwar, Behror, Rajgarh and Tijara was discussed. The Rs 1132 crore projects to be executed in the area were given a nod in principle by the authorities. The proposals regarding the projects were forwarded by the Alwar district collector, an official said.

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Old June 13th, 2012, 07:35 PM   #515
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Rajasthan Cabinet to take up projects plans worth Rs 9,800 cr for approval today

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JAIPUR: Ten investment proposals worth Rs 9,800 crore will be tabled for approval by the state Cabinet committee in a meeting scheduled on Wednesday. If cleared, these companies, ranging form automobiles to automatic teller machines, cements and pharmaceuticals, will open their manufacturing units in the state.

The proposals include Brazilian firm Perto which plans to set up a manufacturing plant for automatic teller machines with an investment of Rs 200 crore. The unit will have a capacity of 1,000 machines per month and will come up in Mahindra World City. Officials of the company confirmed that they are ready to roll out the first batch of ATMs by end of June 2013.

Suzlon has proposed to set up a manufacturing unit for rotor blades used in windmills for power production in Jodhpur district. The company has earmarked an investment of Rs 82 crore for the project and is expected to generate employment for 1,500 people.

Lubok industries plans to install a first of its kind recycling plant for iron ore in Sikar district. The company will make steel from leftovers of iron ore.

Similarly, Gujarat based Cadila Pharmaceutical has shown interest in setting up a bulk drug manufacturing unit in Udaipur. The company will invest Rs 500 crore in phases. Land has been allotted to the company by RIICO.

Another Gujarat-based cement company and a subsidiary of Nirma, Siddhivinayak Cement is willing to set up a two million tonnes per annum plant in Pali with Rs 1,200 crore investment.

"The customized packages offered to companies have given us very good results. The government is keen to build the essential physical infrastructure so that more and more companies will show interest to invest in Rajasthan," said official from industry department.

The Cabinet will take up the proposal of Chambal Fertilizers and Chemical Ltd which plans to invest Rs 4,600 crore for a new unit.

Earthmover machine manufacturer JCB India's proposal to set up a plant with an investment of Rs 500 crore will also come up for approval.

Hero MotoCorp Ltd proposal to set up a research and design institute, manufacturing plant and a global parts centre entailing an investment of Rs 900 crore will be placed before the committee for approval.

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Old June 14th, 2012, 05:25 PM   #516
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Last edited by Yagya; June 14th, 2012 at 05:49 PM.
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Old June 14th, 2012, 05:49 PM   #517
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Ghilot, Tapukara now in Rajasthan's Industrialisation Drive

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New Delhi, Jun 14 (IANS): Ghilot and Tapukara in Alwar district are Rajasthan's next focus areas for industrialisation, targeting an investment of more than Rs.15,000 crore and providing jobs to around 150,000 people.

"Some 1,800 acres of land have been acquired in these two areas. One industrial house alone wants to invest Rs.5,000 crore," said Rajendra Bhanawat, managing director of the Rajasthan State Industrial Development and Investment Corp (Riico).

"One of the main attractions among them is the Apparel City at Tapukara. This is expected to create 100,000 additional jobs," said Bhanawat, whose organisation oversees industrialisation in Rajasthan - from land acquisition to financing.

A special purpose vehicle - Rajasthan Integrated Apparel City Ltd - has been created to execute the project in association with the central-government-promoted Apparel Export Promotion Council.

At Ghilot, which is near the famous Neemrana Fort, the plan is for a 750-acre ceramics cluster, a 500-acre extension project of the Japanese Zone at Neemrana and a 300-acre solar city.

"For ceramics, the availability of gas was an issue earlier at Ghilot. Now the gas pipeline that GAIL has to Neemrana is being extended to Ghilot. His reference was to the 214-km Chainsa-Sultanpur-Neemrana gas pipeline.

"We expect the three projects at Ghilot to fetch an investment of over Rs.10,000 crore," he said.

On the extension project, he said, the Japan External Trade Organisation (Jetro) evinced interest for more Japanese companies to set up shop in the vicinity and that was the reason why a part of Ghilot was so chosen.

"So far, we have attracted 38 Japanese companies at Neemrana and among them 17 have already started production." The Japanese companies that have zeroed in on Neemrana include giants such as Daiken, Mitsubishi, Nippon, Mitsui and Imasen.

Giving the big picture of industrialisation in Rajasthan, Bhanawat said Riico has acquired more than 50,000 acres of land thus far and around 2,000-3,000 acres of additional land was being acquired every year.

This has enabled some 323 industrial areas to be created in the state with no sign of any strife over land acquisition, as has been seen in several other states, notably West Bengal.

"Acquisition of land has never been a major problem in Rajasthan. We have a very transparent policy. Our compensation package is also very attractive as we go by the fair market price," said the top Riico executive.

"We never had to use emergency provisions."

He said landowners, who don't want to part with their land, also have the option of giving up their existing undeveloped holdings to Riico and getting back 25-percent of its size as developed land.

"Of the 25 percent land that is re-allotted, 20 percent can be used by them for industrial and residential purposes and the remaining 5 percent for commercial purposes. This way both sides are happy."

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Old June 15th, 2012, 02:28 AM   #518
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After Mahuva debacle, Nirma explores Rajasthan for its plant

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As Nirma’s planned cement plant at Mahuva in Bhavnagar district remains wrangled in legal process, the company is learnt to be in talks with Ahmedabad-based Siddhi Vinayak Cement Limited (SVCL) to set up a plant in negihbouring Rajasthan.

Sources close to the development said Nirma Group founder and chairman Karsanbhai Patel was in Pali district in south Rajasthan for three days last week for a “cement related work”.

Officials in Pali confirmed SVCL and Nirma are setting up a green-field cement plant at Jaitaran, with a joint investment of Rs 1,500 crore. They said SVCL has already purchased land for the plant with an annual capacity of two million tonnes.

While officials from the Nirma Group refused to confirm the development, Pali District Collector Niraj K Pawan said, “Nirma officials have not intimated us about their plan but we have come to know they have tied up with Siddhi Vinayak Cement Ltd to set up a cement plant.”

“The project is happening. However, we do not wish to comment any further,” said an official from the corporate office of SVCL.

Sources in the Gujarat government said the most expensive components of the planned factory would be the kiln and machinery, which, if being shipped or already delivered and lying unused, would amount to huge losses. They said their counterparts in Rajasthan have also informally apprised them of Nirma’s activities.

The company’s plans for a cement factory in Mahuva has been opposed since the beginning by local agriculturists led by rebel BJP MLA Dr Kanu Kalsaria, who insist the plant would lie on 268 hectares of land, large parts of which is an artificial wetland and adversely affect locals’ livelihoods.

The controversy had later reached the Gujarat High Court, the Supreme Court and currently the National Green Tribunal (NGT).

In the course of events, the Union Ministry of Environment and Forests (MoEF) on December 1, 2011 revoked the Environment Clearance it had granted to Nirma in 2008. Nirma subsequently challenged this order in the NGT. When the locals opposing the planned plant heard of this, they asked they also be named as respondents in the case.

The NGT allowed this on May 1 after observing that locals too have “interest in the subject matter of the appeal and unless an opportunity is granted to them, to put forth their grievance, great prejudice shall be caused”.

The next hearing in the case is scheduled for July 25.

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Old June 20th, 2012, 03:54 PM   #519
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जेके सीमेंट चित्तौड़ में करेगी 1000 करोड़ का निवेश


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जेके सीमेंट लिमिटेड चित्तौडग़ढ़ जिले में स्थित अपने मांगरोल प्लांट की उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर 1000 करोड़ रुपए का निवेश करेगी। इसके बाद प्लांट की मौजूदा क्षमता दस लाख टन सालाना से बढ़कर तीस लाख टन सालाना हो जाएगी। दिसंबर 2014 तक इसमें बढ़ी हुई क्षमता से उत्पादन शुरू हो जाएगा। यह जानकारी मंगलवार को यहां कंपनी के स्पेशल एग्जीक्युटिव राघवपत सिंघानिया ने विशेष भेंट में दी।

कंपनी के निंबाहेड़ा (चित्तौड़) और गोटन (नागौर) के अलावा कर्नाटक में भी ग्रे और व्हाइट सीमेंट प्लांट हैं। इन सभी संयंत्रों की कुल उत्पादन क्षमता बढ़कर दस करोड़ टन हो जाएगी। अब कंपनी फुजिरा (दुबई) में ऐसा प्लांट लगाने जा रही है जिसमें एक ही संयंत्र से ग्रे और व्हाइट सीमेंट का उत्पादन एक साथ हो सकेगा। इस पर लगभग 800 करोड़ रु. का निवेश होगा और उत्पादन अगले साल नवंबर तक शुरू हो जाएगा। सिंघानिया ने कहा कि उनका लक्ष्य कंपनी को शीघ्र ही उत्तर भारत की तीन शीर्ष सीमेंट निर्माता कंपनियों में शामिल करने का है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सीमेंट उद्योग आर्थिक मंदी से अप्रभावित रहेगा और इस वित्त वर्ष में आवास मांग में बढ़ोतरी होगी। उनके अनुसार उत्तर भारत में सीमेंट की ग्रोथ रेट 12' रहने की आशा है। सिंघानिया ने कहा कि कंपनी के संचालन में युवा पीढ़ी की भूमिका काफी निर्णायक होती जा रही है। इसमें उनके भाई माधवकृष्ण की भी अहम भूमिका है जो तकनीकी पहलुओं पर खास ध्यान दे रहे हैं।

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Old June 26th, 2012, 01:26 AM   #520
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Daikin to manufacture room airconditioners at Rajasthan plant

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NEW DELHI, JUNE 25:

Daikin Airconditioning India Pvt Ltd, a 100 per cent subsidiary of Daikin Industries Ltd, Japan, will soon start manufacturing room-air-conditioners at its Neemrana plant in Rajasthan.

The Neemrana plant hitherto produces Variable Refrigerant Volume (VRV) units and chillers for its B2B segment.

The company has chalked out an investment plan of Rs 250 crore for the new line. “The new room air conditioners line will start commercial production from August-September,” said Mr Kanwal Jeet Jawa, Managing Director, Daikin Airconditioning India.

At present, the company imports room air conditioners from its facilities in Thailand and Japan. The proposed line will have an annual capacity of 5 lakh units.

Indicating a possible moderation in prices of room air conditioners, post production in India, the company said, “We want to make products in India with an Indian price tag to take on the mass segment.”

Currently Daikin room air conditioners are priced at 15-20 per cent premium to the market average.

“At present our priority is localisation and manufacturing energy efficient products. Slowdown will not affect our plans as we are preparing ourselves for 2015,” added Mr Jawa.

The company plans to increase its headcount from the current 1,038 to 2,500 by 2015, including another 500 employees at its Neemrana facility by the end of current fiscal.

Mr Jawa ruled out any further price hike for the rest of the calendar year. “We change our pricing policy only once, at the start of the calendar year in January. In January, we had hiked our prices by 7-12 per cent across product categories. Next change will come only in January 2013,” he said.

Daikin Airconditioning India closed the last fiscal with a turnover of Rs 1,220 crore and is looking at a growth of 40-50 per cent in the current fiscal year.

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